(N/A) वाष्पीकरण: सोडियम क्लोराइड एक अवाष्पशील विलेय है,इसलिए पानी को वाष्पित करके इसे इसके जलीय घोल से प्राप्त किया जा सकता है।
$(b)$ निस्यंदन (फिल्ट्रेशन): चाय की पत्तियां अघुलनशील ठोस होती हैं जिन्हें छलनी या फिल्टर पेपर का उपयोग करके चाय से अलग किया जा सकता है।
$(c)$ चुंबकीय पृथक्करण: लोहे की पिन चुंबकीय होती है,जबकि रेत नहीं; इसलिए,पिन को आकर्षित करके अलग करने के लिए चुंबक का उपयोग किया जा सकता है।
$(d)$ क्रोमैटोग्राफी: इस तकनीक का उपयोग विलायक में उनकी अलग-अलग घुलनशीलता के आधार पर विभिन्न वर्णकों को अलग करने के लिए किया जाता है।
$(e)$ अपकेंद्रण (सेंट्रिफ्यूगेशन): दही में मक्खन के कण तरल की तुलना में हल्के होते हैं; मिश्रण को तेज गति से घुमाने पर सघन घटक बाहर की ओर चले जाते हैं,जिससे मक्खन अलग हो जाता है।
$(f)$ निस्तारण और निस्यंदन: महीन मिट्टी के कणों को नीचे बैठने (अवसादन) देकर फिर निस्तारण किया जा सकता है,या निस्यंदन का उपयोग करके सीधे हटाया जा सकता है।