(N/A) $(i)$ $S_{N}1$ क्रम: $CH_{3}CH_{2}CH_{2}CH_{2}Br < (CH_{3})_{2}CHCH_{2}Br < CH_{3}CH_{2}CH(Br)CH_{3} < (CH_{3})_{3}CBr$
$S_{N}2$ क्रम: $CH_{3}CH_{2}CH_{2}CH_{2}Br > (CH_{3})_{2}CHCH_{2}Br > CH_{3}CH_{2}CH(Br)CH_{3} > (CH_{3})_{3}CBr$
$S_{N}1$ में,अभिक्रियाशीलता कार्बोकेशन की स्थिरता पर निर्भर करती है। तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक। प्राथमिक में,प्रेरणिक प्रभाव (inductive effect) के कारण $(CH_{3})_{2}CHCH_{2}Br$,$CH_{3}CH_{2}CH_{2}CH_{2}Br$ से अधिक अभिक्रियाशील है। $S_{N}2$ में,अभिक्रियाशीलता त्रिविम बाधा (steric hindrance) पर निर्भर करती है। प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक।
$(ii)$ $S_{N}1$ क्रम: $C_{6}H_{5}CH_{2}Br < C_{6}H_{5}CH(CH_{3})Br < C_{6}H_{5}CH(C_{6}H_{5})Br < C_{6}H_{5}C(CH_{3})(C_{6}H_{5})Br$
$S_{N}2$ क्रम: $C_{6}H_{5}C(CH_{3})(C_{6}H_{5})Br < C_{6}H_{5}CH(C_{6}H_{5})Br < C_{6}H_{5}CH(CH_{3})Br < C_{6}H_{5}CH_{2}Br$
$S_{N}1$ में,कार्बोकेशन की स्थिरता फेनिल समूहों के अनुनाद (resonance) द्वारा बढ़ती है। $C_{6}H_{5}C(CH_{3})(C_{6}H_{5})Br$ एक तृतीयक बेंजिलिक कार्बोकेशन बनाता है,जो सबसे अधिक स्थिर है। $S_{N}2$ में,त्रिविम बाधा बढ़ने के साथ अभिक्रियाशीलता कम हो जाती है।