(N/A) नाइट्रीकरण एक इलेक्ट्रॉनरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जहाँ दर एरोमैटिक वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व पर निर्भर करती है। नाइट्रोनियम आयन $(NO_2^+)$ एक इलेक्ट्रॉनरागी के रूप में कार्य करता है।
$1$. टोल्यूनि में $-CH_3$ समूह एक इलेक्ट्रॉन-दाता समूह ($+I$ प्रभाव और अतिसंयुग्मन) है,जो बेंजीन वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाता है,जिससे यह बेंजीन की तुलना में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति अधिक सक्रिय हो जाता है।
$2$. $m$-डाइनाइट्रोबेंजीन में $-NO_2$ समूह एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह ($-I$ और $-M$ प्रभाव) है,जो बेंजीन वलय के इलेक्ट्रॉन घनत्व को काफी कम कर देता है,जिससे यह सबसे कम सक्रिय हो जाता है।
$3$. बेंजीन की सक्रियता टोल्यूनि और $m$-डाइनाइट्रोबेंजीन के बीच होती है।
अतः,टोल्यूनि सबसे आसानी से नाइट्रीकरण करता है क्योंकि मिथाइल समूह वलय को इलेक्ट्रॉनरागी हमले के लिए सक्रिय करता है।