(N/A) $(i)$ $[NiCl_{4}]^{2-}$: $Ni$,$+2$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। $Ni^{2+}$ का विन्यास $3d^{8}$ है। $Cl^-$ एक दुर्बल क्षेत्र लिगेंड है,इसलिए युग्मन नहीं होता है। यह $sp^3$ संकरण से गुजरता है। ज्यामिति: चतुष्फलकीय। चुंबकीय गुण: अनुचुंबकीय ($n=2$,$\mu = 2.82 \ B.M.$)।
$(ii)$ $[Ni(CN)_{4}]^{2-}$: $Ni$,$+2$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। $Ni^{2+}$ का विन्यास $3d^{8}$ है। $CN^-$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो $3d$ इलेक्ट्रॉनों के युग्मन का कारण बनता है। यह $dsp^2$ संकरण से गुजरता है। ज्यामिति: वर्ग समतलीय। चुंबकीय गुण: प्रतिचुंबकीय ($n=0$,$\mu = 0 \ B.M.$)।
$(iii)$ $[Ni(CO)_{4}]$: $Ni$,$0$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। $Ni$ का विन्यास $3d^{8} 4s^{2}$ है। $CO$ एक प्रबल क्षेत्र लिगेंड है,जो $4s$ इलेक्ट्रॉनों को $3d$ कक्षकों में युग्मित करता है। यह $sp^3$ संकरण से गुजरता है। ज्यामिति: चतुष्फलकीय। चुंबकीय गुण: प्रतिचुंबकीय ($n=0$,$\mu = 0 \ B.M.$)।
$(iv)$ $MnO_{4}^{-}$: $Mn$,$+7$ ऑक्सीकरण अवस्था में है। $Mn^{7+}$ का विन्यास $3d^{0}$ है। यह $sd^3$ (या $d^3s$) संकरण से गुजरता है। ज्यामिति: चतुष्फलकीय। चुंबकीय गुण: प्रतिचुंबकीय $(n=0)$।