एक प्रकाश-संवेदी पदार्थ पर,जब आपतित विकिरण की आवृत्ति में $30 \%$ की वृद्धि की जाती है,तो उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा $0.4 \ eV$ से बढ़कर $0.9 \ eV$ हो जाती है। सतह का कार्य फलन (work function) है ($eV$ में)

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$eV_0 - \nu$ ग्राफ का ढाल (slope) लिखें।

एक पदार्थ का कार्य फलन (work function) $4.0 \,eV$ है। प्रकाश की वह अधिकतम तरंगदैर्ध्य जो इस पदार्थ से प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन उत्पन्न कर सकती है,लगभग ......... $nm$ है।

आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,धातु से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा और आपतित विकिरण की आवृत्ति के बीच खींचा गया ग्राफ एक सीधी रेखा देता है,जिसका ढाल (slope):

जब $\lambda_1$ तरंगदैर्ध्य के फोटॉन एक पृथक गोले पर आपतित होते हैं,तो संबंधित निरोधी विभव (stopping potential) $V$ पाया जाता है। जब $\lambda_2$ तरंगदैर्ध्य के फोटॉन का उपयोग किया जाता है,तो निरोधी विभव उपरोक्त मान का तीन गुना होता है। यदि $\lambda_3$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का उपयोग किया जाता है,तो इस स्थिति के लिए निरोधी विभव ज्ञात कीजिए।

$4 \ eV$ कार्यफलन वाली धातु की सतह पर $6 \ eV$ ऊर्जा का फोटॉन आपतित होने पर,उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की न्यूनतम गतिज ऊर्जा ......... $eV$ है।

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