(N/A) वृषण की स्थिति और संरचना:
वृषण उदर गुहा के बाहर एक थैलीनुमा संरचना में स्थित होते हैं,जिसे वृषणकोष (scrotum) कहा जाता है। वृषणकोष वृषण के तापमान को कम रखने में मदद करता है (शरीर के सामान्य आंतरिक तापमान से $2-2.5^{\circ}C$ कम),जो शुक्राणुजनन (spermatogenesis) के लिए आवश्यक है।
वयस्कों में,प्रत्येक वृषण अंडाकार आकार का होता है,जिसकी लंबाई लगभग $4$ से $5 \text{ cm}$ और चौड़ाई लगभग $2$ से $3 \text{ cm}$ होती है। प्रत्येक वृषण एक सघन आवरण से ढका होता है।
शुक्रजनक नलिकाएं:
प्रत्येक वृषण में लगभग $250$ कक्ष होते हैं जिन्हें वृषण पालिकाएं (testicular lobules) कहा जाता है। प्रत्येक पालिका में एक से तीन अत्यधिक कुंडलित शुक्रजनक नलिकाएं होती हैं जिनमें शुक्राणुओं का उत्पादन होता है।
प्रत्येक शुक्रजनक नलिका के अंदर दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं जिन्हें नर जनन कोशिकाएं (शुक्राणुजन) और सर्टोली कोशिकाएं कहा जाता है।
नर जनन कोशिकाएं अर्धसूत्री विभाजन से गुजरती हैं जो अंततः शुक्राणु निर्माण की ओर ले जाती हैं,जबकि सर्टोली कोशिकाएं जनन कोशिकाओं को पोषण प्रदान करती हैं।
शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर के क्षेत्रों को अंतराली अवकाश (interstitial spaces) कहा जाता है,जिसमें छोटी रक्त वाहिकाएं और अंतराली कोशिकाएं या लीडिग कोशिकाएं होती हैं। लीडिग कोशिकाएं एण्ड्रोजन नामक वृषण हार्मोन का संश्लेषण और स्राव करती हैं।