(A) हाँ,रुद्धोष्म (adiabatic) संपीड़न के दौरान,गैस का तापमान बढ़ जाता है जबकि उसे कोई ऊष्मा नहीं दी जाती है।
रुद्धोष्म प्रक्रिया में,ऊष्मा विनिमय $\Delta Q = 0$ होता है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार:
$\Delta Q = dU + dW$
चूंकि $\Delta Q = 0$,इसलिए $0 = dU + dW$,जिसका अर्थ है $dU = -dW$।
संपीड़न के दौरान,गैस पर कार्य किया जाता है,इसलिए किया गया कार्य $dW$ ऋणात्मक होता है $(dW < 0)$।
इस मान को समीकरण में रखने पर: $dU = -(-|dW|) = |dW|$।
चूंकि $dU > 0$,गैस की आंतरिक ऊर्जा बढ़ जाती है।
चूंकि एक आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा $U$ उसके परम तापमान $T$ के सीधे आनुपातिक होती है $(U \propto T)$,इसलिए आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि के परिणामस्वरूप गैस का तापमान बढ़ जाता है।