(N/A) पदार्थ की भौतिक अवस्था दो विपरीत बलों के बीच प्रतिस्पर्धा द्वारा निर्धारित होती है: अंतरआणविक बल और तापीय ऊर्जा।
$1$. अंतरआणविक बल: ये बल अणुओं को एक साथ रखने की प्रवृत्ति रखते हैं,जो तरल और ठोस जैसी संघनित अवस्थाओं के निर्माण को बढ़ावा देते हैं।
$2$. तापीय ऊर्जा: यह अणुओं की गति की ऊर्जा है,जो पदार्थ के तापमान के कारण उत्पन्न होती है। यह अणुओं को एक-दूसरे से दूर रखने की प्रवृत्ति रखती है,जो गैसीय अवस्था को बढ़ावा देती है।
पदार्थ की तीन अवस्थाएं इन दो कारकों के बीच संतुलन का परिणाम हैं:
- जब अंतरआणविक बल प्रभावी होते हैं,तो पदार्थ ठोस या तरल के रूप में मौजूद होता है।
- जब तापीय ऊर्जा प्रभावी होती है,तो पदार्थ गैस के रूप में मौजूद होता है।
जैसा कि आरेख में दिखाया गया है,गैस से ठोस की ओर संक्रमण अंतरआणविक आकर्षणों की बढ़ती प्रधानता से प्रेरित होता है,जबकि ठोस से गैस की ओर संक्रमण तापीय ऊर्जा की बढ़ती प्रधानता से प्रेरित होता है। यदि तापीय ऊर्जा अधिक हो तो केवल संपीड़न द्वारा गैसों को द्रवित नहीं किया जा सकता; तापमान कम करने से तापीय ऊर्जा कम हो जाती है,जिससे अंतरआणविक बल अणुओं को एक साथ रखने में सक्षम हो जाते हैं,जिससे द्रवीकरण आसान हो जाता है।