(N/A) सफल परागण के बाद,परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है। पराग नलिका एक जनन छिद्र से बाहर निकलती है। पराग नलिका वर्तिका के ऊतकों से होकर बढ़ती है और अंडाशय तक पहुँचती है।
बीजांड तक पहुँचने पर,पराग नलिका आमतौर पर बीजांडद्वार के माध्यम से भ्रूणपोष में प्रवेश करती है। सहायक कोशिकाओं (synergids) के बीजांडद्वारी सिरे पर मौजूद तंतुमय समुच्चय (filiform apparatus) पराग नलिका के प्रवेश का मार्गदर्शन करते हैं।
एक बार सहायक कोशिका के अंदर पहुँचने के बाद,पराग नलिका फट जाती है और दो नर युग्मकों को मुक्त करती है। एक नर युग्मक अंड कोशिका के साथ संलयन (syngamy) करके युग्मनज बनाता है,जबकि दूसरा नर युग्मक दो ध्रुवीय केंद्रकों के साथ संलयन (त्रिसंलयन) करके प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक $(PEN)$ बनाता है।
अंड उपकरण दो सहायक कोशिकाओं और एक अंड कोशिका से बना होता है।