एक ऊष्मागतिक निकाय की अवस्था $A$ से $B$ में परिवर्तन के दौरान, निकाय को दी गई ऊष्मा $Q$ है और निकाय द्वारा किया गया कार्य $W$ है। इसकी आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन है

  • A
    $Q + W$
  • B
    $Q - W$
  • C
    $Q$
  • D
    $\frac{Q - W}{2}$

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$Assertion:$ किसी निकाय को दी गई ऊष्मा हमेशा उसकी आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होती है।
$Reason:$ जब कोई निकाय एक तापीय संतुलन से दूसरे में परिवर्तित होता है,तो उसके द्वारा कुछ ऊष्मा अवशोषित की जाती है।

एक निकाय (system) को दी गई ऊष्मा $35 \ J$ है और निकाय द्वारा किया गया कार्य $15 \ J$ है। निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ..... $J$ होगा।

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम बताता है कि:

एक ऊष्मागतिक प्रक्रिया में,गैस के एक निश्चित द्रव्यमान का दबाव इस तरह से बदलता है कि गैस $30 \,J$ ऊष्मा छोड़ती है और गैस पर $10 \,J$ कार्य किया जाता है। यदि गैस की प्रारंभिक आंतरिक ऊर्जा $10 \,J$ थी,तो अंतिम आंतरिक ऊर्जा क्या होगी ($\,J$ में)?

कथन : ऊष्मा और कार्य किसी निकाय में ऊर्जा स्थानांतरण के तरीके हैं जिसके परिणामस्वरूप इसकी आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन होता है।
कारण : ऊष्मा और कार्य ऊष्मागतिकी (thermodynamics) में अवस्था चर (state variables) हैं।
निम्नलिखित में से सही विकल्प है

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