(N/A) जब कैथोड पर अपचयन के लिए एक से अधिक प्रजातियाँ उपलब्ध होती हैं,तो जिस प्रजाति का मानक इलेक्ट्रोड विभव $(E^\circ)$ अधिक (अधिक धनात्मक) होता है,उसका अपचयन प्राथमिकता से होता है।
इसका कारण यह है कि उच्च $E^\circ$ मान इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की अधिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
उदाहरण: $NaCl$ के जलीय विलयन में,कैथोड के पास $Na^+$ आयन और $H_2O$ के अणु दोनों उपस्थित होते हैं।
इनके अपचयन विभव इस प्रकार हैं:
$Na^+ + e^- \rightarrow Na$ $(E^\circ = -2.71 \ V)$
$2H_2O + 2e^- \rightarrow H_2(g) + 2OH^-(aq)$ $(E^\circ = -0.83 \ V)$
चूँकि $-0.83 \ V > -2.71 \ V$ है,इसलिए $Na^+$ आयनों के बजाय कैथोड पर जल के अणुओं का अपचयन होता है,जिसके परिणामस्वरूप $H_2$ गैस निकलती है।