(N/A) $PCR$ का अर्थ है पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन। यह एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग $DNA$ के एक विशिष्ट खंड को इन-विट्रो (पात्र में) प्रवर्धित करने के लिए किया जाता है। $PCR$ के प्रत्येक चक्र में तीन मुख्य चरण होते हैं:
$A$: विकृतीकरण (Denaturation): द्विरज्जुक $DNA$ को उच्च तापमान (लगभग $94-98^{\circ}C$) पर गर्म किया जाता है,जिससे दोनों रज्जुक अलग होकर एकल-रज्जुक $DNA$ में बदल जाते हैं।
$B$: तापानुशीतन (Annealing): तापमान को कम किया जाता है (आमतौर पर $50-65^{\circ}C$),ताकि दो ओलिगोन्यूक्लियोटाइड प्राइमर एकल-रज्जुक $DNA$ टेम्पलेट पर अपने पूरक अनुक्रमों के साथ जुड़ सकें।
$C$: विस्तार (Extension): तापमान को समायोजित किया जाता है (आमतौर पर $72^{\circ}C$),ताकि ऊष्मा-स्थिर $DNA$ पॉलीमरेज़ (जैसे,$Taq$ पॉलीमरेज़) प्राइमर में न्यूक्लियोटाइड्स जोड़कर एक नई $DNA$ रज्जुक का संश्लेषण कर सके,जिसमें मूल $DNA$ टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है। लक्षित $DNA$ खंड के घातांकीय प्रवर्धन के लिए इस प्रक्रिया को कई चक्रों तक दोहराया जाता है।