(N/A) $H_2O_2$ का सांद्रण: औद्योगिक रूप से प्राप्त $H_2O_2$ का विलयन लगभग $30\%$ (द्रव्यमान द्वारा) होता है। इसे कम दाब पर सावधानीपूर्वक आसवन द्वारा $\sim 85\%$ तक सांद्रित किया जा सकता है। शेष पानी को जमाकर शुद्ध $H_2O_2$ प्राप्त किया जा सकता है。
संरचनात्मक अंतर:
- $H_2O$ की संरचना मुड़ी हुई (कोणीय) होती है, जिसमें बंध कोण $104.5^\circ$ और $O-H$ बंध लंबाई $95.7 \text{ pm}$ होती है。
- $H_2O_2$ की संरचना असमतलीय 'खुली किताब' जैसी होती है। गैसीय अवस्था में द्वितल कोण $111.5^\circ$ और ठोस अवस्था में $90.2^\circ$ होता है。
$H_2O_2$ के उपयोग:
$1$. इसका उपयोग एंटीसेप्टिक और माउथवॉश के रूप में किया जाता है (परहाइड्रोल के रूप में)।
$2$. इसका उपयोग सोडियम परबोरेट और सोडियम कार्बोनेट जैसे रसायनों के निर्माण में किया जाता है。
$3$. इसका उपयोग वस्त्रों, कागज की लुगदी और तेलों के लिए विरंजन कारक (ब्लीचिंग एजेंट) के रूप में किया जाता है।