(N/A) $DNA$ एक जलरागी (hydrophilic) अणु है,इसलिए यह कोशिका झिल्ली से होकर नहीं गुजर सकता। बैक्टीरिया को प्लाज्मिड लेने के लिए मजबूर करने हेतु,बैक्टीरियल कोशिकाओं को सक्षम बनाना आवश्यक है। यह निम्नलिखित विधियों द्वारा प्राप्त किया जाता है:
$1$. रासायनिक उपचार: बैक्टीरियल कोशिकाओं को कैल्शियम जैसे द्विसंयोजक धनायन (divalent cation) की एक विशिष्ट सांद्रता के साथ उपचारित किया जाता है। यह कोशिका भित्ति के छिद्रों के माध्यम से $DNA$ के प्रवेश की दक्षता को बढ़ाता है।
$2$. हीट शॉक विधि: $r-DNA$ को इन कोशिकाओं में प्रवेश कराने के लिए,कोशिकाओं को बर्फ पर रीकॉम्बिनेंट $DNA$ के साथ रखा जाता है,फिर $42^{\circ} C$ पर संक्षिप्त हीट शॉक दिया जाता है,और अंत में वापस बर्फ पर रखा जाता है। यह बैक्टीरिया को रीकॉम्बिनेंट $DNA$ लेने में सक्षम बनाता है।
$3$. माइक्रो-इंजेक्शन: रीकॉम्बिनेंट $DNA$ को सीधे जंतु कोशिका के केंद्रक में इंजेक्ट किया जाता है।
$4$. बायोलिस्टिक्स (जीन गन): कोशिकाओं पर $DNA$ से लेपित सोने या टंगस्टन के उच्च वेग वाले सूक्ष्म कणों की बौछार की जाती है।
$5$. निशस्त्र रोगजनक वाहक: इन वाहकों को कोशिकाओं को संक्रमित करने दिया जाता है,जिससे रीकॉम्बिनेंट $DNA$ मेजबान में स्थानांतरित हो जाता है।
$6$. इलेक्ट्रोपोरेशन: कोशिका झिल्ली को $DNA$ प्रवेश के लिए पारगम्य बनाने हेतु कोशिकाओं को उच्च वोल्टेज के विद्युत पल्स दिए जाते हैं।
$7$. लिपोफेक्शन: रीकॉम्बिनेंट $DNA$ को लिपिड की परत से ढका जाता है,जिससे यह कोशिका झिल्ली से होकर गुजर सकता है।