(N/A) कॉन्ड्रिक्थीस और ऑस्टिक्थीस:
कॉन्ड्रिक्थीस:
- ये समुद्री जीव हैं जिनका शरीर धाराप्रवाही (streamlined) और अंतःकंकाल उपास्थिमय (cartilaginous) होता है।
- मुख अधर (ventral) स्थिति में होता है।
- पृष्ठरज्जु (notochord) जीवन भर बनी रहती है।
- क्लोम छिद्र अलग-अलग होते हैं और ऑपरकुलम (क्लोम ढक्कन) नहीं होता है।
- त्वचा सख्त होती है,जिसमें सूक्ष्म प्लेकोइड शल्क होते हैं।
- दांत रूपांतरित प्लेकोइड शल्क होते हैं जो पीछे की ओर मुड़े होते हैं।
- इनके जबड़े बहुत शक्तिशाली होते हैं।
- ये जीव शिकारी होते हैं।
- वायु आशय (air bladder) की अनुपस्थिति के कारण,डूबने से बचने के लिए इन्हें लगातार तैरना पड़ता है।
- हृदय द्विकोष्ठीय (एक अलिंद और एक निलय) होता है।
- कुछ में विद्युत अंग (जैसे,$Torpedo$) और कुछ में विषैला डंक (जैसे,$Trygon$) होता है।
- ये असमतापी (poikilothermous) जीव हैं।
- लिंग अलग-अलग होते हैं। नर में श्रोणि पंखों (pelvic fins) में क्लैस्पर्स होते हैं।
- इनमें आंतरिक निषेचन होता है और कई जरायुज (viviparous) होते हैं।
- उदाहरण: $Scoliodon$ (डॉग फिश),$Pristis$ (सॉ फिश)।
ऑस्टिक्थीस:
- इनमें समुद्री और मीठे पानी की दोनों मछलियाँ शामिल हैं जिनका अंतःकंकाल अस्थिमय होता है।
- शरीर धाराप्रवाही होता है। मुख अधिकांशतः अग्रस्थ होता है।
- इनमें चार जोड़ी क्लोम होते हैं जो प्रत्येक तरफ ऑपरकुलम द्वारा ढके होते हैं।
- त्वचा साइक्लोइड/टीनोइड शल्कों से ढकी होती है।
- वायु आशय उपस्थित होता है जो उत्प्लावकता को नियंत्रित करता है।
- हृदय द्विकोष्ठीय होता है।
- ये असमतापी जीव हैं।
- लिंग अलग-अलग होते हैं। निषेचन आमतौर पर बाह्य होता है। ये अधिकांशतः अंडज (oviparous) होते हैं और विकास प्रत्यक्ष होता है।
- उदाहरण: $Hippocampus$ (सी हॉर्स),$Labeo$ (रोहू)।
$(b)$ यूरोकॉर्डेटा और सिफेलोकॉर्डेटा:
यूरोकॉर्डेटा (ट्यूनिकेटा):
- पृष्ठरज्जु केवल लार्वा की पूंछ में उपस्थित होती है।
- उदाहरण: $Ascidia$,$Salpa$,$Doliolum$।
सिफेलोकॉर्डेटा:
- पृष्ठरज्जु सिर से पूंछ क्षेत्र तक फैली होती है और जीवन भर बनी रहती है।
- उदाहरण: $Branchiostoma$ (एम्फिऑक्सस या लैंसलेट)।