(N/A) प्रकृति में,परागण इस बात की गारंटी नहीं देता है कि सुसंगत या सही प्रकार के परागकण का ही स्थानांतरण होगा। अक्सर,गलत प्रकार के परागकण,या तो अन्य प्रजातियों से या उसी पौधे से (यदि वह स्व-असंगत है),वर्तिकाग्र पर आ गिरते हैं।
स्त्रीकेसर में परागकण को पहचानने की क्षमता होती है कि वह सही प्रकार का है या गलत प्रकार का।
यदि परागकण सही प्रकार (सुसंगत) का होता है,तो स्त्रीकेसर परागकण को स्वीकार कर लेता है और परागण के बाद की घटनाओं को बढ़ावा देता है जो निषेचन की ओर ले जाती हैं।
यदि परागकण गलत प्रकार (असुसंगत) का होता है,तो स्त्रीकेसर परागकण के अंकुरण को रोककर उसे अस्वीकार कर देता है। परागकण को पहचानने और उसके बाद उसे स्वीकार या अस्वीकार करने की स्त्रीकेसर की क्षमता,परागकण और स्त्रीकेसर के बीच निरंतर संवाद का परिणाम है। यह संवाद दोनों में मौजूद रासायनिक घटकों और प्रोटीन तत्वों द्वारा संचालित होता है।
हाल के वर्षों में ही वनस्पतिशास्त्री परागकण और स्त्रीकेसर के कुछ घटकों और पहचान की ओर ले जाने वाली अंतःक्रियाओं की पहचान करने में सक्षम हुए हैं,जिसके बाद स्वीकृति या अस्वीकृति होती है। सुसंगत परागण में,परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है और जनन छिद्रों में से एक के माध्यम से पराग नलिका का निर्माण करता है,और परागकण की सामग्री पराग नलिका में चली जाती है।