| कटिंग (Cutting) | ग्राफ्टिंग (Grafting) |
|---|---|
| $(1)$ जड़ या तने के कटे हुए टुकड़ों को नम मिट्टी में लगाया जाता है। | $(1)$ दो अलग-अलग पौधों का मिलन स्थापित किया जाता है। |
| $(2)$ इन्हें दूसरी जगहों पर स्थानांतरित (transplant) किया जा सकता है। | $(2)$ इसमें स्थानांतरण की आवश्यकता नहीं होती है। |
| $(3)$ तने या जड़ के कटे हुए टुकड़ों से अपस्थानिक जड़ें (adventitious roots) विकसित होती हैं। | $(3)$ यह उन पौधों में किया जाता है जिनका जड़ तंत्र कमजोर होता है। |
| $(4)$ कटे हुए तने या जड़ के वायवीय भाग अंकुरित होते हैं। | $(4)$ मुख्य भाग को स्टॉक (stock) और ग्राफ्ट किए गए भाग को सायन (scion) कहा जाता है। |
| $(5)$ पौधे में जनक के समान ही लक्षण मौजूद होते हैं। | $(5)$ पौधे में सायन (scion) के लक्षण दिखाई देते हैं। |
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