(N/A) $\Rightarrow$ प्रत्येक एंजाइम $(E)$ के अणु में एक सब्सट्रेट $(S)$ बाइंडिंग साइट होती है,जहाँ सब्सट्रेट जुड़कर एंजाइम-सब्सट्रेट कॉम्प्लेक्स $(ES)$ बनाता है। यह जल्द ही अपने उत्पाद $(P)$ और अपरिवर्तित एंजाइम में विघटित हो जाता है,जिसमें मध्यवर्ती के रूप में एंजाइम-उत्पाद कॉम्प्लेक्स $(EP)$ का निर्माण होता है।
$\Rightarrow$ $ES$ कॉम्प्लेक्स का निर्माण उत्प्रेरण के लिए आवश्यक है।
$\Rightarrow$ अभिक्रिया का क्रम: $E + S \rightleftharpoons ES \longrightarrow EP \longrightarrow E + P$
$\Rightarrow$ इसे निम्नलिखित चरणों में समझाया जा सकता है:
$(1)$ सबसे पहले,सब्सट्रेट एंजाइम की सक्रिय साइट (active site) से जुड़ता है और उसमें फिट हो जाता है।
$(2)$ सब्सट्रेट का जुड़ना एंजाइम को अपना आकार बदलने के लिए प्रेरित करता है,जिससे वह सब्सट्रेट के चारों ओर अधिक मजबूती से फिट हो जाता है।
$(3)$ एंजाइम की सक्रिय साइट,जो अब सब्सट्रेट के निकट है,सब्सट्रेट के रासायनिक बंधों को तोड़ती है और नया एंजाइम-उत्पाद कॉम्प्लेक्स $(EP)$ बनता है।
$(4)$ एंजाइम अभिक्रिया के उत्पादों को मुक्त कर देता है और मुक्त एंजाइम सब्सट्रेट के दूसरे अणु के साथ जुड़ने और उत्प्रेरक चक्र को फिर से चलाने के लिए तैयार हो जाता है।