(A-III, B-I, C-IV, D-II) अभिक्रियाओं का विश्लेषण इस प्रकार है:
$(A)$ एसीटैल्डिहाइड शुष्क $HCl$ गैस की उपस्थिति में इथेनॉल के साथ अभिक्रिया करके एसीटल बनाता है: $CH_3CHO + 2C_2H_5OH \xrightarrow{HCl_{(g)}} CH_3CH(OC_2H_5)_2 + H_2O$। यह $(iii)$ से मेल खाता है।
$(B)$ एसीटोन शुष्क $HCl$ गैस की उपस्थिति में एथिलीन ग्लाइकॉल के साथ अभिक्रिया करके चक्रीय कीटल बनाता है: $CH_3COCH_3 + HOCH_2CH_2OH \xrightarrow{HCl_{(g)}} (CH_3)_2C(OCH_2)_2 + H_2O$। यह $(i)$ से मेल खाता है।
$(C)$ एसीटैल्डिहाइड $HCN$ के साथ अभिक्रिया करके साइनोहाइड्रिन बनाता है,जिसका अम्लीय जल-अपघटन करने पर हाइड्रॉक्सी अम्ल प्राप्त होता है: $CH_3CHO + HCN$ $\xrightarrow{OH^-} CH_3CH(OH)CN$ $\xrightarrow{H_3O^+} CH_3CH(OH)COOH$। यह $(iv)$ से मेल खाता है।
$(D)$ एसीटैल्डिहाइड $HCN$ के साथ अभिक्रिया करके साइनोहाइड्रिन बनाता है: $CH_3CHO + HCN \xrightarrow{OH^-} CH_3CH(OH)CN$। यह $(ii)$ से मेल खाता है।
अतः,सही सुमेलन है: $A-iii, B-i, C-iv, D-ii$।