(A-D) कवक मृतोपजीवी (saprotrophic) पोषण विधि दर्शाते हैं,जिसमें वे सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
$(b)$ कवक की कोशिका भित्ति काइटिन (chitin) नामक एक जटिल पॉलीसैकराइड से बनी होती है।
$(c)$ नील-हरित शैवाल और कवक के बीच के सहजीवी संबंध को लाइकेन (lichens) कहा जाता है।
$(d)$ रासायनिक रूप से,काइटिन एक जटिल कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) है,जो एक नाइट्रोजन युक्त पॉलीसैकराइड ($N$-acetylglucosamine) है।
$(e)$ जाति (species) वर्गीकरण की सबसे छोटी इकाई है और इसमें जीवों की संख्या सबसे कम होती है,जिनमें अधिकतम समान लक्षण पाए जाते हैं।
$(f)$ जिन पौधों में शरीर की संरचना स्पष्ट रूप से विभेदित (तना,जड़ और पत्ती) नहीं होती है,उन्हें थैलोफाइटा (thallophyta) समूह में रखा जाता है।
$(g)$ ब्रायोफाइट्स (bryophytes) को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है क्योंकि वे जमीन पर रहने के बावजूद निषेचन के लिए पानी पर निर्भर रहते हैं।