भारत में भ्रूणविज्ञान के विज्ञान को आगे बढ़ाने वाले प्रसिद्ध भ्रूणविज्ञानी हैं:

  • A
    रामदास
  • B
    एन. माहेश्वरी
  • C
    स्वामीनाथन
  • D
    पी. माहेश्वरी

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पादपों में लैंगिक जनन का महत्व समझाइए।

पपीता और खजूर .......... पादपों के उदाहरण हैं।

$A$: $60\%$ आवृतबीजी पौधों में परिपक्व नर युग्मकोद्भिद के निर्माण के लिए एक अर्धसूत्री और दो समसूत्री विभाजनों की आवश्यकता होती है।
$R$: अधिकांश आवृतबीजी पौधों में परागण दो-कोशिकीय अवस्था में होता है।

निम्नलिखित कथनों के लिए सही विकल्प चुनें:
$(i)$ आवृतबीजी पौधों के भ्रूणकोष में,निषेचन के बाद सहायक कोशिकाएं और प्रतिव्यासांत कोशिकाएं (antipodals) नष्ट हो जाती हैं / नष्ट नहीं होती हैं।
$(ii)$ द्विबीजपत्री पौधों की पत्तियों में समानांतर / जालिकावत शिराविन्यास देखा जाता है।

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन $(A)$ और दूसरे को कारण $(R)$ के रूप में लेबल किया गया है।
अभिकथन $(A)$: वायु और जल द्वारा परागित पुष्प बहुत रंगीन नहीं होते हैं और मकरंद (nectar) उत्पन्न नहीं करते हैं।
कारण $(R)$: वायु और जल द्वारा परागित पुष्पों में अत्यधिक मात्रा में परागकण उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में,नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

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