(N/A) इस विधि में,धातु को उसके वाष्पशील यौगिक में परिवर्तित किया जाता है,जिसे एकत्रित करके शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए विघटित किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए दो आवश्यकताएँ हैं:
$(i)$ धातु को उपलब्ध अभिकर्मक के साथ एक वाष्पशील यौगिक बनाना चाहिए।
$(ii)$ वाष्पशील यौगिक आसानी से विघटित होने वाला होना चाहिए,ताकि रिकवरी आसान हो।
इस तकनीक के उदाहरण:
$(a)$ निकेल के परिष्करण के लिए मॉन्ड प्रक्रम: निकेल को कार्बन मोनोऑक्साइड की धारा में गर्म किया जाता है जिससे निकेल टेट्राकार्बोनिल नामक वाष्पशील संकुल बनता है। इस संकुल को उच्च तापमान पर विघटित करके शुद्ध धातु प्राप्त की जाती है।
$Ni (\text{अशुद्ध}) + 4 CO \xrightarrow{330-350 \ K} Ni(CO)_{4}$
$Ni(CO)_{4} \xrightarrow{450-470 \ K} Ni (\text{शुद्ध}) + 4 CO$
$(b)$ जिरकोनियम या टाइटेनियम के परिष्करण के लिए वैन आर्कल विधि: यह विधि $Zr$ और $Ti$ जैसी धातुओं में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की अशुद्धियों को दूर करने के लिए उपयोगी है। कच्ची धातु को आयोडीन के साथ एक निर्वातित पात्र में गर्म किया जाता है जिससे वाष्पशील धातु आयोडाइड बनता है।
$Zr + 2 I_{2} \rightarrow ZrI_{4} (\text{अशुद्ध})$
धातु आयोडाइड को टंगस्टन फिलामेंट पर विघटित किया जाता है,जिसे विद्युत द्वारा लगभग $1800 \ K$ तक गर्म किया जाता है। शुद्ध धातु फिलामेंट पर जमा हो जाती है।
$ZrI_{4} \rightarrow Zr (\text{शुद्ध}) + 2 I_{2}$