(N/A) सीवेज उपचार मुख्य रूप से दो चरणों में किया जाता है:
$1$. प्राथमिक उपचार (Primary Treatment): इस चरण में निस्पंदन (filtration) और अवसादन (sedimentation) के माध्यम से सीवेज से बड़े और छोटे कणों को भौतिक रूप से हटाना शामिल है।
- शुरू में,तैरते हुए कचरे को क्रमिक निस्पंदन द्वारा हटा दिया जाता है।
- फिर,कंकड़-पत्थर को अवसादन द्वारा हटा दिया जाता है।
- नीचे बैठने वाले सभी ठोस पदार्थ 'प्राथमिक स्लज' बनाते हैं और ऊपर के तरल को 'एफ्लुएंट' कहा जाता है।
$2$. द्वितीयक उपचार या जैविक उपचार (Secondary Treatment): प्राथमिक एफ्लुएंट को बड़े वातन टैंकों (aeration tanks) में भेजा जाता है,जहाँ इसे यांत्रिक रूप से लगातार हिलाया जाता है और इसमें हवा पंप की जाती है।
- यह उपयोगी वायवीय सूक्ष्मजीवों की 'फ्लॉक्स' (बैक्टीरिया और कवक के तंतुओं का जाल जैसा ढांचा) के रूप में तेजी से वृद्धि करने में मदद करता है।
- बढ़ते समय,ये सूक्ष्मजीव एफ्लुएंट में मौजूद अधिकांश कार्बनिक पदार्थों का उपभोग करते हैं,जिससे एफ्लुएंट का $BOD$ (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) काफी कम हो जाता है।
-$BOD$ उस ऑक्सीजन की मात्रा को संदर्भित करता है जो एक लीटर पानी में मौजूद सभी कार्बनिक पदार्थों को बैक्टीरिया द्वारा ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक होती है।
- अपशिष्ट जल का $BOD$ जितना अधिक होगा,उसकी प्रदूषण क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
- एक बार जब $BOD$ काफी कम हो जाता है,तो एफ्लुएंट को एक निस्तारण टैंक (settling tank) में भेजा जाता है जहाँ बैक्टीरियल फ्लॉक्स नीचे बैठ जाते हैं। इस अवसाद को 'सक्रियित स्लज' (activated sludge) कहा जाता है।
- सक्रियित स्लज का एक छोटा हिस्सा इनोक्युलम के रूप में वातन टैंक में वापस पंप किया जाता है।
- स्लज का शेष मुख्य हिस्सा 'अवायवीय स्लज पाचक' (anaerobic sludge digesters) नामक बड़े टैंकों में पंप किया जाता है।
- यहाँ अवायवीय बैक्टीरिया स्लज में मौजूद बैक्टीरिया और कवक का पाचन करते हैं,जिससे मीथेन,हाइड्रोजन सल्फाइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं,जो 'बायोगैस' बनाती हैं।
- द्वितीयक उपचार संयंत्र से प्राप्त एफ्लुएंट को आमतौर पर नदियों और झरनों जैसे प्राकृतिक जल निकायों में छोड़ दिया जाता है।