(N/A) कोलाइडल विलयन तैयार किए जाने पर उनमें इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य घुलनशील अशुद्धियों की अधिक मात्रा होती है। हालांकि कोलाइडल विलयन की स्थिरता के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स के अंश आवश्यक हैं,लेकिन बड़ी मात्रा में ये स्कंदन (coagulation) का कारण बन सकते हैं। इसलिए,इन घुलनशील अशुद्धियों की सांद्रता को आवश्यक न्यूनतम स्तर तक कम करना आवश्यक है।
अशुद्धियों की मात्रा को आवश्यक न्यूनतम स्तर तक कम करने की प्रक्रिया को कोलाइडल विलयन का शुद्धिकरण कहा जाता है। कोलाइडल विलयन का शुद्धिकरण निम्नलिखित विधियों द्वारा किया जाता है:
$(i)$ डायलिसिस: यह एक उपयुक्त झिल्ली (membrane) के माध्यम से विसरण (diffusion) द्वारा कोलाइडल विलयन से घुले हुए पदार्थ को हटाने की प्रक्रिया है। वास्तविक विलयन में कण (आयन या छोटे अणु) पशु झिल्ली (मूत्राशय),चर्मपत्र कागज या सेलोफेन शीट से गुजर सकते हैं,लेकिन कोलाइडल कण नहीं गुजर सकते।
कोलाइडल विलयन वाली उपयुक्त झिल्ली की एक थैली को एक ऐसे बर्तन में लटकाया जाता है जिसमें ताजा पानी लगातार बह रहा होता है। अणु और आयन झिल्ली के माध्यम से बाहर के पानी में विसरित हो जाते हैं और शुद्ध कोलाइडल विलयन पीछे रह जाता है। इस उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण को डायलाइज़र कहा जाता है।
$(ii)$ इलेक्ट्रो-डायलिसिस: सामान्य तौर पर,डायलिसिस की प्रक्रिया काफी धीमी होती है। यदि अशुद्ध कोलाइडल विलयन में घुला हुआ पदार्थ केवल एक इलेक्ट्रोलाइट है,तो विद्युत क्षेत्र लागू करके इसे तेज किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रो-डायलिसिस कहा जाता है।