संयोजकता आबंध सिद्धांत (Valence Bond Theory) के आधार पर $H_{2}$ अणु के निर्माण की व्याख्या कीजिए।

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(N/A) मान लीजिए दो हाइड्रोजन परमाणु $A$ और $B$ एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं, जिनके नाभिक $N_{A}$ और $N_{B}$ हैं और इलेक्ट्रॉन $e_{A}$ और $e_{B}$ द्वारा दर्शाए गए हैं।
जब दोनों परमाणु एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं, तो उनके बीच कोई पारस्परिक क्रिया नहीं होती है। इस समय निकाय की ऊर्जा दोनों $H$ परमाणुओं की ऊर्जा के योग के बराबर होती है। प्रत्येक परमाणु में नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच आकर्षण होता है ($N_{A}-e_{A}$ और $N_{B}-e_{B}$)।
जब दोनों परमाणु $H_{A}$ और $H_{B}$ एक-दूसरे के करीब आते हैं, तो उनके बीच आकर्षण और प्रतिकर्षण बल उत्पन्न होते हैं:
$(i)$ आकर्षण बल: ये बल परमाणु के अपने नाभिक और उसके अपने इलेक्ट्रॉन ($N_{A}-e_{A}$, $N_{B}-e_{B}$) के बीच और एक परमाणु के नाभिक तथा दूसरे परमाणु के इलेक्ट्रॉन ($N_{A}-e_{B}$ और $N_{B}-e_{A}$) के बीच उत्पन्न होते हैं।
$(ii)$ प्रतिकर्षण बल:
दो परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन के बीच प्रतिकर्षण बल $(e_{A}-e_{B})$ उत्पन्न होता है।
दो परमाणुओं के नाभिक-नाभिक के बीच प्रतिकर्षण बल $(N_{A}-N_{B})$ उत्पन्न होता है।
- आकर्षण बल दोनों परमाणुओं को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास करते हैं, जबकि प्रतिकर्षण बल उन्हें एक-दूसरे से दूर धकेलने का प्रयास करते हैं।
- प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि आकर्षण बलों का परिमाण प्रतिकर्षण बलों की तुलना में अधिक होता है। परिणामस्वरूप, दोनों परमाणु एक-दूसरे के करीब आते हैं और उनकी स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती है।
$H_{2}$ निर्माण: $(i)$ दोनों परमाणु एक-दूसरे के इतने करीब आते हैं कि आकर्षण बल और प्रतिकर्षण बल संतुलित हो जाते हैं और $(ii)$ निकाय न्यूनतम ऊर्जा प्राप्त करता है। $(iii)$ इस चरण पर दोनों हाइड्रोजन परमाणु एक-दूसरे के साथ जुड़ जाते हैं। $(iv)$ एक स्थिर हाइड्रोजन अणु का निर्माण होता है। $(v)$ आबंध लंबाई $74 \ pm$ होती है।

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