(N/A) $(i)$ समतल ध्रुवित प्रकाश: जब साधारण प्रकाश को निकोल प्रिज्म से गुजारा जाता है,तो एक ही तल में कंपन करने वाला प्रकाश प्राप्त होता है। इसे समतल ध्रुवित प्रकाश कहते हैं।
$(ii)$ प्रकाशिक सक्रियता: जब समतल ध्रुवित प्रकाश को कुछ यौगिकों के विलयन से गुजारा जाता है,तो प्रकाश या तो दक्षिणावर्त या वामावर्त दिशा में घूम जाता है। इस गुण को प्रकाशिक सक्रियता कहते हैं।
$(iii)$ कायरलिटी: वह वस्तु जो अपने दर्पण प्रतिबिंब पर अध्यारोपित नहीं हो सकती,कायरल कहलाती है।
$(iv)$ कायरल केंद्र: वह कार्बन परमाणु जो चार अलग-अलग समूहों से जुड़ा होता है,कायरल केंद्र कहलाता है।
$(v)$ प्रतिबिंब रूप: वे त्रिविम समावयवी जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं लेकिन एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं होते,प्रतिबिंब रूप कहलाते हैं।
$(vi)$ अप्रतिबिंब रूप: वे त्रिविम समावयवी जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब नहीं होते,अप्रतिबिंब रूप कहलाते हैं।
$(vii)$ मीसो यौगिक: वह यौगिक जिसमें दो या दो से अधिक कायरल केंद्र होते हैं लेकिन उसमें सममिति का आंतरिक तल होता है,मीसो यौगिक कहलाता है।
$(viii)$ सममिति का तल और अकायरल अणु: सममिति का तल एक काल्पनिक तल है जो अणु को दो समान भागों में विभाजित करता है। जिस अणु में सममिति का तल होता है,वह अकायरल होता है।
$(ix)$ सममिति का केंद्र: अणु में स्थित वह बिंदु जिससे होकर गुजरने वाली रेखा दोनों ओर समान दूरी पर समान परमाणुओं या समूहों से मिलती है।