(N/A) $(1)$ $Ga$ की प्रथम आयनन एन्थैल्पी $(579 \ kJ \ mol^{-1})$ $Al$ $(577 \ kJ \ mol^{-1})$ से अधिक होती है क्योंकि $Ga$ में उपस्थित $d$-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) दुर्बल होता है। इससे प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है,जो संयोजी इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से जकड़े रखता है।
$(2)$ बोरॉन का परमाणु आकार बहुत छोटा होता है और इसकी प्रथम तीन आयनन एन्थैल्पियों का योग $(\Delta_{i}H_{1} + \Delta_{i}H_{2} + \Delta_{i}H_{3})$ बहुत अधिक होता है। तीन इलेक्ट्रॉनों को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा इतनी अधिक होती है कि इसकी भरपाई जालक ऊर्जा या जलयोजन ऊर्जा द्वारा नहीं हो पाती है,इसलिए बोरॉन $B^{3+}$ आयन नहीं बनाता है और इसके बजाय सहसंयोजक यौगिक बनाता है।