(N/A) $S_{N}2$ अभिक्रिया में न्यूक्लियोफाइल का लिविंग ग्रुप से जुड़े कार्बन परमाणु पर पीछे से आक्रमण होता है। इस अभिक्रिया के पक्ष में निम्नलिखित कारक हैं:
$1$. त्रिविम बाधा (Steric Hindrance): यह अभिक्रिया त्रिविम बाधा के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। लिविंग ग्रुप वाले कार्बन से जुड़े एल्काइल समूहों की संख्या बढ़ने पर न्यूक्लियोफाइल का पहुंचना कठिन हो जाता है। अतः,अभिक्रियाशीलता का क्रम: $\text{Methyl halide} > 1^{\circ} > 2^{\circ} > 3^{\circ}$ है।
$2$. न्यूक्लियोफाइल की शक्ति: एक मजबूत,ऋणात्मक आवेशित न्यूक्लियोफाइल $S_{N}2$ अभिक्रिया की दर को बढ़ाता है।
$3$. विलायक: ध्रुवीय एप्रोटिक विलायक (जैसे एसीटोन,$DMSO$,$DMF$) को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि वे न्यूक्लियोफाइल को मजबूती से विलायकित नहीं करते हैं,जिससे उसकी क्रियाशीलता बनी रहती है।
$4$. लिविंग ग्रुप: एक अच्छा लिविंग ग्रुप (जैसे $I^- > Br^- > Cl^-$) आसानी से निकलकर अभिक्रिया को सुगम बनाता है।