(N/A) $(i)$ कार्बन मोनोऑक्साइड $(CO)$ के प्रभाव:
- कार्बन मोनोऑक्साइड $(CO)$ एक गंभीर वायु प्रदूषक है। यह रंगहीन और गंधहीन गैस है।
- यह अंगों और ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोकता है,जिससे यह जीवित जीवों के लिए अत्यधिक जहरीला हो जाता है।
- यह कोयला,लकड़ी और पेट्रोल जैसे कार्बन-आधारित ईंधन के अधूरे दहन और वाहनों के धुएं से उत्पन्न होता है।
- $CO$ हीमोग्लोबिन के साथ जुड़कर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है,जो ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन कॉम्प्लेक्स की तुलना में $300$ गुना अधिक स्थिर होता है।
- कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन की सांद्रता $3-4 \%$ तक पहुँचने पर रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है,जिससे सिरदर्द,कमजोर दृष्टि और हृदय संबंधी विकार होते हैं।
$(ii)$ कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ के प्रभाव:
- $CO_2$ श्वसन,जीवाश्म ईंधन के जलने और सीमेंट निर्माण जैसी औद्योगिक प्रक्रियाओं से उत्सर्जित होती है।
- यह क्षोभमंडल तक ही सीमित है और सामान्यतः वायुमंडल के आयतन का $0.03 \%$ होती है।
- जीवाश्म ईंधन के बढ़ते उपयोग और वनों की कटाई से वायुमंडल में $CO_2$ का स्तर बढ़ जाता है।
- अतिरिक्त $CO_2$ ग्लोबल वार्मिंग के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है,क्योंकि यह वायुमंडल में गर्मी को रोक कर रखती है।