(N/A) बेंजीन के $H$-परमाणु का $-Br$ समूह द्वारा प्रतिस्थापन ब्रोमीनीकरण कहलाता है। इस अभिक्रिया में $FeBr_3$ लुईस अम्ल उत्प्रेरक के रूप में और $Br_2$ अभिकर्मक के रूप में कार्य करता है।
$1$. इलेक्ट्रॉनरागी (Electrophile) का निर्माण: उत्प्रेरक $FeBr_3$,$Br_2$ के साथ अभिक्रिया करके इलेक्ट्रॉनरागी,ब्रोमीनियम आयन $(Br^+)$ उत्पन्न करता है।
$FeBr_3 + Br-Br \rightleftharpoons Br^+ + FeBr_4^-$
$2$. क्रियाविधि: यह अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन द्वारा दो चरणों में पूर्ण होती है:
चरण $1$ (धीमा चरण): इलेक्ट्रॉनरागी $Br^+$ बेंजीन वलय पर आक्रमण करता है और एक कार्बधनायन मध्यवर्ती बनाता है जिसे $\sigma$-संकुल या एरेनियम आयन कहा जाता है। इस चरण में,आक्रमण के स्थान पर कार्बन परमाणु का संकरण $sp^2$ से $sp^3$ में बदल जाता है। यह चरण धीमा है क्योंकि बेंजीन वलय की एरोमैटिकता अस्थायी रूप से नष्ट हो जाती है।
$\sigma$-संकुल अनुनाद द्वारा स्थिर होता है,जैसा कि संरचनाओं $(A)$,$(B)$ और $(C)$ द्वारा दिखाया गया है,जिसमें $(D)$ संकर संरचना है।
चरण $2$ (तेज चरण): $\sigma$-संकुल एरोमैटिकता को बहाल करने के लिए $FeBr_4^-$ आयन को एक प्रोटॉन $(H^+)$ खो देता है,जिससे ब्रोमोबेंजीन बनता है और $HBr$ के साथ उत्प्रेरक $FeBr_3$ पुनः प्राप्त हो जाता है।