(N/A) $S_{N}1$ अभिक्रिया में,यदि क्रियाधार (अर्थात,एल्किल हैलाइड) प्रकाशिक सक्रिय है,तो यह आंशिक रेसेमीकरण (racemisation) का परिणाम देता है।
मध्यवर्ती के रूप में बनने वाला कार्बधनायन (carbocation) समतलीय होता है,जिससे नाभिकरागी (nucleophile) किसी भी तरफ से आक्रमण कर सकता है।
यदि नाभिकरागी अवशिष्ट समूह (leaving group) की उसी तरफ से आक्रमण करता है,तो विन्यास का प्रतिधारण (retention) होता है।
यदि नाभिकरागी अवशिष्ट समूह की विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,तो विन्यास का प्रतिलोमन (inversion) होता है।
चूंकि विपरीत दिशा से आक्रमण थोड़ा अधिक अनुकूल होता है,इसलिए उत्पाद में प्रतिबिंब रूप (enantiomers) असमान मात्रा में प्राप्त होते हैं,जिससे आंशिक रेसेमीकरण होता है।
यदि प्रतिबिंब रूप $50:50$ के अनुपात में प्राप्त होते हैं,तो इसे रेसेमिक मिश्रण कहा जाता है,जो प्रकाशिक रूप से निष्क्रिय होता है और इसे $(\pm)$ द्वारा दर्शाया जाता है।
उदाहरण: प्रकाशिक सक्रिय $2-$ब्रोमोब्यूटेन का जल-अपघटन $(\pm)-$ब्यूटेन$-2-$ऑल के निर्माण का परिणाम देता है।