(N/A) रेडॉक्स अभिक्रियाओं को एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर विचार करें:
$(1)$ $2 Na_{(s)} + Cl_{2_{(g)}} \rightarrow 2 NaCl_{(s)}$
$(2)$ $4 Na_{(s)} + O_{2_{(g)}} \rightarrow 2 Na_{2}O_{(s)}$
$(3)$ $2 Na_{(s)} + S_{(s)} \rightarrow Na_{2}S_{(s)}$
इन अभिक्रियाओं में,$Na$ इलेक्ट्रॉन खोकर $Na^{+}$ आयन बनाता है,जिसका ऑक्सीकरण होता है। अधातुएं $(Cl_2, O_2, S)$ इन इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करके ऋण आयन बनाती हैं,जिनका अपचयन (रिडक्शन) होता है।
उदाहरण के लिए,अभिक्रिया $(1)$ में:
$2 Na_{(s)} \rightarrow 2 Na^{+} + 2 e^{-}$ (ऑक्सीकरण)
$Cl_{2_{(g)}} + 2 e^{-} \rightarrow 2 Cl^{-}$ (अपचयन)
कुल मिलाकर,$Na$ एक अपचायक (इलेक्ट्रॉन दाता) के रूप में और अधातु एक ऑक्सीकारक (इलेक्ट्रॉन स्वीकर्ता) के रूप में कार्य करती है।