(N/A) सोडियम कार्बोनेट $(Na_{2}CO_{3} \cdot 10H_{2}O)$ सामान्यतः सोल्वे प्रक्रम द्वारा तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट की कम घुलनशीलता का लाभ उठाया जाता है,जिससे यह सोडियम क्लोराइड और अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट की अभिक्रिया के दौरान अवक्षेपित हो जाता है।
अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट को अमोनिया से संतृप्त सोडियम क्लोराइड के सांद्र विलयन में $CO_{2}$ प्रवाहित करके तैयार किया जाता है,जहाँ पहले अमोनियम कार्बोनेट और फिर अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनता है। पूरी प्रक्रिया के समीकरण इस प्रकार हैं:
$2NH_{3} + H_{2}O + CO_{2} \rightarrow (NH_{4})_{2}CO_{3}$
$(NH_{4})_{2}CO_{3} + H_{2}O + CO_{2} \rightarrow 2NH_{4}HCO_{3}$
$NH_{4}HCO_{3} + NaCl \rightarrow NH_{4}Cl + NaHCO_{3}$
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के क्रिस्टल अलग हो जाते हैं। इन्हें गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है:
$2NaHCO_{3} \rightarrow Na_{2}CO_{3} + CO_{2} + H_{2}O$
इस प्रक्रिया में,जब $NH_{4}Cl$ युक्त विलयन को $Ca(OH)_{2}$ के साथ उपचारित किया जाता है तो $NH_{3}$ पुनः प्राप्त हो जाता है। कैल्शियम क्लोराइड उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है:
$2NH_{4}Cl + Ca(OH)_{2} \rightarrow 2NH_{3} + CaCl_{2} + H_{2}O$