(N/A) विभिन्न कक्षकों में भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या अपवर्जन सिद्धांत द्वारा सीमित होती है,जिसे ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक वोल्फगैंग पाउली $(1926)$ द्वारा दिया गया था।
नियम: "एक परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का सेट समान नहीं हो सकता।"
वैकल्पिक कथन: एक ही कक्षक में केवल दो इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं और इन इलेक्ट्रॉनों का चक्रण (spin) विपरीत होना चाहिए।
नियम के अनुसार,दो इलेक्ट्रॉनों के लिए तीन क्वांटम संख्याएँ $n, l,$ और $m_l$ समान हो सकती हैं,लेकिन उनकी चक्रण क्वांटम संख्या ($m_s = +\frac{1}{2}$ और $m_s = -\frac{1}{2}$) अलग होनी चाहिए।
उपयोग: पाउली का अपवर्जन सिद्धांत किसी भी उपकोष (subshell) में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम क्षमता की गणना करने में मदद करता है।
- $1s$ उपकोष में एक कक्षक होता है; इसलिए,$1s$ उपकोष में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या दो हो सकती है।
- $p, d,$ और $f$ उपकोषों में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या क्रमशः $6, 10,$ और $14$ होती है।
मुख्य क्वांटम संख्या $n$ के लिए,कक्षकों की संख्या $n^2$ है और इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या $2n^2$ है।
उदाहरण: हीलियम $(He)$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^2$ है। इन दो इलेक्ट्रॉनों के लिए $n, l,$ और $m_l$ के मान क्रमशः $1, 0, 0$ हैं। उनकी चक्रण क्वांटम संख्याएँ $+\frac{1}{2}$ और $-\frac{1}{2}$ हैं,जो एक-दूसरे से भिन्न हैं।