(N/A) $\rightarrow$ कॉकरोच का तंत्रिका तंत्र अधर (ventral) सतह पर स्थित खंडीय रूप से व्यवस्थित और आपस में जुड़े हुए तंत्रिका गुच्छों (ganglia) की एक श्रृंखला से बना होता है,जो युग्मित अनुदैर्ध्य संयोजियों (longitudinal connectives) द्वारा जुड़े होते हैं। तीन तंत्रिका गुच्छे वक्ष में और छह उदर में स्थित होते हैं।
$\rightarrow$ ग्रास नली के ऊपरी भाग में मस्तिष्क होता है,जिसे सुप्रा-ओसोफेगल गैन्ग्लियन भी कहा जाता है। यह तीन तंत्रिका गुच्छों के जुड़ने से बनता है।
$\rightarrow$ मस्तिष्क से दो पेरि-ओसोफेगल संयोजी निकलते हैं। वे ग्रास नली के पार्श्व किनारों से गुजरते हैं और शरीर के अधर भाग में स्थित सब-ओसोफेगल गैन्ग्लियन से जुड़कर एक तंत्रिका वलय (nerve ring) बनाते हैं।
$\rightarrow$ कॉकरोच का तंत्रिका तंत्र पूरे शरीर में फैला होता है। सिर में तंत्रिका तंत्र का केवल एक छोटा हिस्सा होता है,जबकि बाकी हिस्सा शरीर के अधर भाग में स्थित होता है। इसलिए,यदि कॉकरोच का सिर काट दिया जाए,तो भी वह एक सप्ताह तक जीवित रह सकता है।
$\rightarrow$ सिर के क्षेत्र में,सुप्रा-ओसोफेगल गैन्ग्लियन एंटीना और संयुक्त आंखों को तंत्रिकाएं प्रदान करता है।
$\rightarrow$ कॉकरोच के संवेदी अंगों में एंटीना,आंखें,मैक्सिलरी पाल्प्स,लेबियल पाल्प्स और एनल सर्सी आदि शामिल हैं।
$\rightarrow$ संयुक्त आंखें सिर की पृष्ठीय सतह पर स्थित होती हैं। प्रत्येक आंख लगभग $2000$ षट्कोणीय ओमेटीडिया से बनी होती है। इन ओमेटीडिया की मदद से,कॉकरोच किसी वस्तु की कई छवियां प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार की दृष्टि को मोज़ेक दृष्टि कहा जाता है,जिसमें संवेदनशीलता अधिक लेकिन रिज़ॉल्यूशन कम होता है,जो रात के दौरान सामान्य है (इसलिए इसे निशाचर दृष्टि कहा जाता है)।