(N/A) हेलोऐल्केन तीन प्रकार की समावयवता प्रदर्शित करते हैं:
$(i)$ श्रृंखला समावयवता: जब समान आणविक सूत्र वाले दो या दो से अधिक हेलोऐल्केन कार्बन श्रृंखला की लंबाई में भिन्न होते हैं,तो उन्हें श्रृंखला समावयवी कहा जाता है।
उदाहरण: $CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-Cl$ ($1$-क्लोरोब्यूटेन) और $CH_3-CH(CH_3)-CH_2-Cl$ ($1$-क्लोरो-$2$-मेथिलप्रोपेन)।
$(ii)$ स्थान समावयवता: जब समान आणविक सूत्र वाले दो या दो से अधिक हेलोऐल्केन कार्बन श्रृंखला से जुड़े हैलोजन परमाणु की स्थिति में भिन्न होते हैं,तो उन्हें स्थान समावयवी कहा जाता है।
उदाहरण: $CH_3-CH_2-CH_2-Cl$ ($1$-क्लोरोप्रोपेन) और $CH_3-CHCl-CH_3$ ($2$-क्लोरोप्रोपेन)।
$(iii)$ प्रकाशिक समावयवता: वे हेलोऐल्केन जिनका आणविक और संरचनात्मक सूत्र समान होता है,लेकिन कायरल कार्बन परमाणु के चारों ओर परमाणुओं या समूहों की त्रिविम व्यवस्था में भिन्न होते हैं और समतल ध्रुवित प्रकाश को घुमाते हैं,उन्हें प्रकाशिक समावयवी कहा जाता है।
उदाहरण: $2$-क्लोरोब्यूटेन के दो प्रतिबिंब रूप।