(N/A) कार्बन का $sp^3$ संकरण: कार्बन की मूल अवस्था $[He] 2s^2 2p^2$ है। $2s$ कक्षक का एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर खाली $2p$ कक्षक में चला जाता है,जिससे कार्बन उत्तेजित अवस्था $(C^*)$ प्राप्त करता है। $C^*$ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $[He] 2s^1 2p_x^1 2p_y^1 2p_z^1$ है।
उत्तेजित कार्बन के चार अर्ध-भरे कक्षक $sp^3$ संकरण से गुजरते हैं और चार समान $sp^3$ संकरित कक्षक बनाते हैं। ये कक्षक उनके बीच प्रतिकर्षण को न्यूनतम रखने के लिए $109.5^{\circ}$ के कोण पर चतुष्फलकीय ज्यामिति में व्यवस्थित होते हैं।
$C_2H_6$ में बंधन: प्रत्येक कार्बन परमाणु अपनी चार $sp^3$ संकरित कक्षकों का उपयोग बंधन बनाने के लिए करता है।
प्रत्येक कार्बन परमाणु का एक $sp^3$ कक्षक अक्षीय रूप से अतिव्यापन (overlap) करके एक $C-C$ सिग्मा $(\sigma)$ बंध बनाता है। प्रत्येक कार्बन पर शेष तीन $sp^3$ संकरित कक्षक हाइड्रोजन के $1s$ कक्षक के साथ अक्षीय रूप से अतिव्यापन करके छह $C-H$ सिग्मा $(\sigma)$ बंध बनाते हैं।
इस प्रकार,एथेन अणु में कुल सात सिग्मा $(\sigma)$ बंध ($1$ $C-C$ और $6$ $C-H$) होते हैं और प्रत्येक कार्बन परमाणु के चारों ओर चतुष्फलकीय ज्यामिति होती है।