(N/A) चमगादड़ अंधेरे में रास्ता खोजने और शिकार करने के लिए 'इकोलोकेशन' (प्रतिध्वनि स्थान निर्धारण) नामक प्रक्रिया का उपयोग करते हैं।
$1$. चमगादड़ अपने मुंह से उच्च आवृत्ति वाली पराध्वनि तरंगें ($20,000 \ Hz$ से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि) उत्पन्न करते हैं।
$2$. ये पराध्वनि तरंगें हवा में यात्रा करती हैं और शिकार (जैसे कि कोई कीट) से टकराती हैं।
$3$. ये तरंगें शिकार द्वारा परावर्तित होकर प्रतिध्वनि (echo) के रूप में वापस आती हैं।
$4$. चमगादड़ अपने संवेदनशील कानों से इन परावर्तित तरंगों (प्रतिध्वनि) को पहचान लेते हैं।
$5$. प्रतिध्वनि के वापस आने में लगे समय और परावर्तित ध्वनि की प्रकृति का विश्लेषण करके,चमगादड़ शिकार की दूरी,आकार,आकृति और दिशा का पता लगा लेते हैं,जिससे वे सटीकता से कीट को पकड़ पाते हैं।