(D) बेंजीन निर्जलीय $FeCl_3$ या $AlCl_3$ जैसे लुईस अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया करके क्लोरोबेंजीन बनाता है। यह एक इलेक्ट्रॉनस्नेही एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है।
अभिक्रिया: $C_6H_6 + Cl_2 \xrightarrow{FeCl_3} C_6H_5Cl + HCl$
क्रियाविधि:
$1.$ इलेक्ट्रॉनस्नेही का निर्माण: लुईस अम्ल हैलोजन के साथ अभिक्रिया करके इलेक्ट्रॉनस्नेही $Cl^{+}$ उत्पन्न करता है।
$Cl-Cl + FeCl_3 \rightarrow Cl^{+} + [FeCl_4]^{-}$
$2.$ इलेक्ट्रॉनस्नेही $Cl^{+}$ बेंजीन वलय पर आक्रमण करके एक सिग्मा संकुल (कार्बोकेशन) बनाता है।
$3.$ सिग्मा संकुल से प्रोटॉन का निष्कासन $[FeCl_4]^{-}$ द्वारा होता है,जो एरोमैटिकता को पुनः स्थापित करता है,जिससे क्लोरोबेंजीन और $HCl$ प्राप्त होते हैं।