(N/A) समावयवता: जिन यौगिकों के अणुसूत्र समान होते हैं लेकिन परमाणुओं की व्यवस्था अलग होने के कारण उनके भौतिक या रासायनिक गुण भिन्न होते हैं,उन्हें समावयवी कहा जाता है और इस घटना को समावयवता कहते हैं।
$(b)$ स्थान समावयवता: यह तब होता है जब समान कार्बन श्रृंखला में क्रियात्मक समूह या प्रतिस्थापी समूह का स्थान बदल जाता है (उदाहरण: $CH_3-CH_2-CH_2-OH$ और $CH_3-CH(OH)-CH_3$)।
$(c)$ श्रृंखला समावयवता: यह कार्बन ढांचे की व्यवस्था में अंतर के कारण उत्पन्न होती है (उदाहरण: $n$-ब्यूटेन और आइसोब्यूटेन)।
$(d)$ क्रियात्मक समूह समावयवता: यह तब होता है जब यौगिकों के अणुसूत्र समान होते हैं लेकिन उनमें अलग-अलग क्रियात्मक समूह होते हैं (उदाहरण: इथेनॉल $CH_3CH_2OH$ और डाइमिथाइल ईथर $CH_3OCH_3$)।
$(e)$ मध्यवयवता: यह बहुसंयोजक क्रियात्मक समूह के दोनों ओर कार्बन परमाणुओं के अलग-अलग वितरण के कारण उत्पन्न होती है (उदाहरण: डाइइथाइल ईथर $CH_3CH_2-O-CH_2CH_3$ और मिथाइल प्रोपाइल ईथर $CH_3-O-CH_2CH_2CH_3$)।
$(f)$ प्रकाशिक समावयवता: यह त्रिविम समावयवता का एक प्रकार है जिसमें समावयवी एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं जो एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं होते,जिन्हें एनैन्टीओमर्स कहा जाता है,जो समतल ध्रुवित प्रकाश को घुमाते हैं।