(A) $(i)$ $Cu_{2}O$ से कॉपर का निष्कर्षण: एलिंगम आरेख में,$Cu_{2}O$ रेखा सबसे ऊपर होती है,जिससे कॉपर ऑक्साइड अयस्कों को कोक के साथ गर्म करके धातु में अपचयित करना आसान हो जाता है। अक्सर,सल्फाइड अयस्कों को भर्जन द्वारा ऑक्साइड में बदला जाता है: $2Cu_{2}S + 3O_{2} \rightarrow 2Cu_{2}O + 2SO_{2}$। इसके बाद ऑक्साइड का अपचयन होता है: $Cu_{2}O + C \rightarrow 2Cu + CO$। व्यवहार में,लोहे को धातुमल $(FeSiO_{3})$ के रूप में हटा दिया जाता है और कॉपर स्वतः-अपचयन द्वारा प्राप्त किया जाता है: $2Cu_{2}O + Cu_{2}S \rightarrow 6Cu + SO_{2}$। इस उत्पाद को फफोलेदार कॉपर (Blister Copper) कहा जाता है।
$(ii)$ $ZnO$ से जिंक का निष्कर्षण: जिंक ऑक्साइड का अपचयन उच्च तापमान $(1673 \ K)$ पर कोक का उपयोग करके किया जाता है। ऑक्साइड को कोक और मिट्टी के साथ मिलाकर ब्रिकेट्स बनाए जाते हैं: $ZnO + C \xrightarrow{1673 \ K} Zn + CO$। इसके बाद जिंक धातु को आसवन द्वारा अलग किया जाता है और तेजी से ठंडा करके एकत्र किया जाता है।