(N/A) साम्यावस्था पर तापमान के प्रभाव को $NO_{2}$ गैस (भूरे रंग की) लेकर प्रदर्शित किया जा सकता है,जो $N_{2}O_{4}$ गैस (रंगहीन) में द्विलकीकृत (dimerise) हो जाती है।
$2NO_{2(g)} \rightleftharpoons N_{2}O_{4(g)}$; $\Delta H = -57.2 \ kJ \ mol^{-1}$
(भूरे रंग की गैस) $\quad$ (रंगहीन गैस)
प्रयोग की विधि: सांद्र $HNO_{3}$ में $Cu$ के टुकड़े डालकर तैयार की गई $NO_{2}$ गैस को दो $5 \ mL$ की परखनली में एकत्रित किया जाता है (यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रत्येक नली में गैस के रंग की तीव्रता समान हो) और कॉर्क को एराल्डाइट से सील कर दिया जाता है। तीन $250 \ mL$ के बीकर $1$,$2$ और $3$ लें।
बीकर $1$ में हिमकारी मिश्रण $(270 \ K)$,बीकर $2$ में कमरे के तापमान पर पानी $(298 \ K)$ और बीकर $3$ में गर्म पानी $(363 \ K)$ लें।
दोनों परखनलियों को $8-10$ मिनट के लिए बीकर $2$ में रखा जाता है। इसके बाद,एक को बीकर $1$ में और दूसरी को बीकर $3$ में रखा जाता है। अभिक्रिया की दिशा पर तापमान के प्रभाव का अवलोकन किया जाता है।
अवलोकन:
$(i)$ बीकर $1$ $(270 \ K)$ में कम तापमान पर,अग्र अभिक्रिया ($N_{2}O_{4}$ का निर्माण) को प्राथमिकता मिलती है क्योंकि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है। अतः,$NO_{2}$ के कारण भूरे रंग की तीव्रता कम हो जाती है।
$(ii)$ बीकर $3$ $(363 \ K)$ में,उच्च तापमान पश्च अभिक्रिया ($NO_{2}$ का निर्माण) का समर्थन करता है और इसलिए,भूरा रंग गहरा हो जाता है।
निष्कर्ष: ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में,तापमान कम करने पर साम्यावस्था अग्र दिशा में और तापमान बढ़ाने पर पश्च दिशा में विस्थापित होती है।