(N/A) कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न तरीके विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर आधारित हैं:
$(a)$ कुंडली को घोड़े की नाल जैसे चुंबक के दो ध्रुवों के बीच तेजी से गति कराना: जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में गति करती है,तो उससे जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स बदल जाता है,जिससे कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
$(b)$ स्थिर कुंडली के सापेक्ष चुंबक को गति कराना: जब किसी चुंबक को कुंडली के पास या दूर ले जाया जाता है,तो कुंडली से गुजरने वाली चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं में परिवर्तन होता है,जो कुंडली में विद्युत धारा को प्रेरित करता है।
$(c)$ पास की कुंडली में धारा में परिवर्तन करना: यदि बदलती धारा वाली दूसरी कुंडली को पहली कुंडली के पास रखा जाता है,तो दूसरी कुंडली द्वारा उत्पन्न बदलता चुंबकीय क्षेत्र पहली कुंडली में धारा को प्रेरित करता है (अन्योन्य प्रेरण)।