सिद्धांत: यह विधि एक अधिशोषक (adsorbent) पर मिश्रण के विभिन्न घटकों के अधिशोषण में अंतर पर आधारित है।
मिश्रण को एक स्थिर प्रावस्था (stationary phase) पर रखा जाता है,जो ठोस या द्रव हो सकती है। एक शुद्ध विलायक,विलायकों का मिश्रण या एक गैस को स्थिर प्रावस्था के ऊपर धीरे-धीरे प्रवाहित किया जाता है। जैसे-जैसे गतिशील प्रावस्था (moving phase) आगे बढ़ती है,मिश्रण के विभिन्न घटक धीरे-धीरे अलग हो जाते हैं। वर्णलेखन की कई तकनीकें हैं जैसे पेपर क्रोमैटोग्राफी,गैस क्रोमैटोग्राफी,थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी और कॉलम क्रोमैटोग्राफी। कॉलम क्रोमैटोग्राफी उन तत्वों के शुद्धिकरण के लिए बहुत उपयोगी है जो बहुत कम मात्रा में उपलब्ध होते हैं और जिनमें अशुद्धियाँ और शुद्ध किए जाने वाले तत्व के रासायनिक गुणों में बहुत अधिक अंतर नहीं होता है।