(N/A) $sp^{3}d$ संकरण में एक $s$,तीन $p$ और एक $d$ कक्षक का मिश्रण होकर पांच समान $sp^{3}d$ संकरित कक्षक बनते हैं।
उदाहरण: $PCl_{5}$ अणु का निर्माण।
$1$. फास्फोरस ($P$,परमाणु क्रमांक $15$) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: मूल अवस्था: $[Ne] 3s^{2} 3p^{3} 3d^{0}$।
$2$. उत्तेजित अवस्था में,$3s$ कक्षक का एक इलेक्ट्रॉन $3d$ कक्षक में चला जाता है: उत्तेजित अवस्था: $[Ne] 3s^{1} 3p^{3} 3d^{1}$।
$3$. ये पांच कक्षक $(3s, 3p_{x}, 3p_{y}, 3p_{z}, 3d_{z^{2}})$ $sp^{3}d$ संकरण से गुजरकर पांच समान $sp^{3}d$ संकरित कक्षक बनाते हैं।
$4$. ये संकरित कक्षक एक त्रिकोणीय द्विपिरामिड के कोनों की ओर निर्देशित होते हैं,जिसके परिणामस्वरूप त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय ज्यामिति प्राप्त होती है।
$5$. बंध कोण $120^{\circ}$ (भूमध्यरेखीय) और $90^{\circ}$ (अक्षीय) होते हैं।
$6$. इन पांच $sp^{3}d$ संकरित कक्षकों में से प्रत्येक,क्लोरीन परमाणु के अर्ध-भरे $p$-कक्षक के साथ अतिव्यापन करके पांच $P-Cl$ $\sigma$-बंध बनाता है।