(N/A) $ATP$ और $NADPH$ प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश-निर्भर अभिक्रियाओं के प्राथमिक उत्पाद हैं। इनका उपयोग जैव-संश्लेषण चरण (जिसे डार्क रिएक्शन या केल्विन चक्र भी कहा जाता है) में $CO_{2}$ और $H_{2}O$ से शर्करा के संश्लेषण के लिए किया जाता है।
$1$. जैव-संश्लेषण चरण: इस चरण को सीधे प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है,लेकिन यह प्रकाश अभिक्रिया के दौरान उत्पादित $ATP$ और $NADPH$ पर निर्भर करता है। ये अणु $CO_{2}$ को कार्बोहाइड्रेट में बदलने के लिए आवश्यक ऊर्जा और अपचयन शक्ति प्रदान करते हैं।
$2$. केल्विन चक्र ($C_{3}$ पथ): इस पथ में,$CO_{2}$ को $3$-कार्बन यौगिक $3$-फॉस्फोग्लिसरिक एसिड $(PGA)$ में स्थिर किया जाता है। $PGA$ को ट्रायोज फॉस्फेट में अपचयित करने के लिए $ATP$ और $NADPH$ का उपयोग किया जाता है,जो अंततः ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाते हैं।
$3$. $C_{4}$ पथ: $C_{4}$ पथ का पालन करने वाले पौधों में,$CO_{2}$ को शुरू में $4$-कार्बन एसिड ऑक्सालोएसेटिक एसिड $(OAA)$ में स्थिर किया जाता है। केल्विन चक्र की आवश्यकताओं के अलावा,इन पौधों में $CO_{2}$ स्वीकर्ता अणु $(PEP)$ को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष रूप से $ATP$ की आवश्यकता होती है।