(N/A) $H_2O$ अणु की संरचना को ऑक्सीजन के $sp^3$ संकरण और $VSEPR$ सिद्धांत की सहायता से समझाया जा सकता है।
$H_2O$ में,मूल अवस्था में ऑक्सीजन का संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2s^2 2p_x^2 2p_y^1 2p_z^1$ होता है,जिसमें दो युग्मित इलेक्ट्रॉन और दो अर्ध-पूर्ण कक्षक होते हैं।
ये चार कक्षक $sp^3$ संकरण से गुजरते हैं,जिसमें दो कक्षक अर्ध-पूर्ण और अन्य दो कक्षक पूरी तरह से भरे होते हैं।
दो अर्ध-पूर्ण $sp^3$ कक्षक $H$ के $1s$ कक्षक के साथ अतिव्यापन (overlap) करते हैं और दो $O-H$ सिग्मा बंध बनाते हैं। दो $sp^3$ कक्षक अनाबंधी (lone pairs) होते हैं।
$VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,एकाकी युग्मों (lone pairs) के बीच प्रतिकर्षण,बंध युग्मों (bond pairs) की तुलना में अधिक होता है। इस अतिरिक्त प्रतिकर्षण के कारण,दो $O-H$ बंध करीब आ जाते हैं,और बंध कोण $104.5^{\circ}$ हो जाता है। इस प्रकार,$H_2O$ की आकृति $V$ (कोणीय) होती है।