(N/A) यह ज्यामिति $NH_3$ में $N$ के $sp^3$ संकरण और $VSEPR$ सिद्धांत द्वारा समझाई जाती है।
$NH_3$ में,नाइट्रोजन का संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $2s^2 2p_x^1 2p_y^1 2p_z^1$ होता है। यह $sp^3$ संकरण से चार $sp^3$ संकरित कक्षक बनाता है,जिनमें से तीन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं और एक में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) होता है।
ये तीन संकरित कक्षक तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के $1s$ कक्षकों के साथ अतिव्यापन करके तीन $N-H$ सिग्मा बंध बनाते हैं। एक $sp^3$ कक्षक में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म शेष रहता है।
$VSEPR$ सिद्धांत के अनुसार,एकाकी युग्म और बंध युग्म के बीच प्रतिकर्षण बल,दो बंध युग्मों के बीच के प्रतिकर्षण बल से अधिक होता है।
इस प्रतिकर्षण के कारण,अणु की ज्यामिति आदर्श चतुष्फलकीय से विकृत हो जाती है और बंध कोण $109.5^{\circ}$ से घटकर $107^{\circ}$ हो जाता है। इस प्रकार,$NH_3$ अणु की ज्यामिति त्रिकोणीय पिरामिडीय हो जाती है।