(N/A) $1$. परिभाषा: प्रकाश की उपस्थिति में $ADP$ और अकार्बनिक फॉस्फेट $(Pi)$ से $ATP$ के संश्लेषण की प्रक्रिया को प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण (Photophosphorylation) कहा जाता है।
$2$. कार्यप्रणाली: अचक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण में,दो प्रकाशतंत्र,$PS-II$ और $PS-I$,एक इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (electron transport chain) द्वारा श्रृंखला में कार्य करते हैं।
$3$. प्रक्रिया: प्रकाश अवशोषण के बाद $PS-II$ से इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं,जो इलेक्ट्रॉन परिवहन प्रणाली से गुजरते हुए $PS-I$ तक पहुँचते हैं। इस परिवहन के दौरान एक प्रोटॉन प्रवणता (proton gradient) उत्पन्न होती है,जिससे $ATP$ का संश्लेषण होता है।
$4$. अंतिम चरण: $PS-I$ से मुक्त हुए इलेक्ट्रॉनों को अंततः $NADP^+$ द्वारा स्वीकार किया जाता है,जिससे $NADPH + H^+$ का निर्माण होता है।
$5$. महत्व: इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप $ATP$ और $NADPH + H^+$ दोनों का उत्पादन होता है,जो प्रकाश संश्लेषण के जैव-संश्लेषण चरण के लिए आवश्यक हैं।