(N/A) आवृतबीजी पौधों का जीवन चक्र एक प्रभावी,द्विगुणित $(2n)$ बीजाणुद्भिद (sporophytic) अवस्था और एक संक्षिप्त,अगुणित $(n)$ युग्मकोद्भिद (gametophytic) अवस्था के बीच पीढ़ी एकांतरण द्वारा पहचाना जाता है।
$1$. बीजाणुद्भिद अवस्था $(2n)$: मुख्य पादप शरीर बीजाणुद्भिद होता है,जो फूल उत्पन्न करता है। फूल के भीतर,परागकोश (पुंकेसर का हिस्सा) में लघुबीजाणुधानी होती है जहाँ लघुबीजाणु मातृ कोशिकाएं अर्धसूत्रीविभाजन द्वारा अगुणित लघुबीजाणु बनाती हैं। इसी प्रकार,अंडाशय (स्त्रीकेसर का हिस्सा) में गुरुबीजाणुधानी (बीजांड) होती है जहाँ गुरुबीजाणु मातृ कोशिका अर्धसूत्रीविभाजन द्वारा अगुणित गुरुबीजाणु बनाती है।
$2$. युग्मकोद्भिद अवस्था $(n)$: लघुबीजाणु नर युग्मकोद्भिद (परागकण) में विकसित होता है,जो नर युग्मक उत्पन्न करता है। गुरुबीजाणु मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) में विकसित होता है,जिसमें अंड कोशिका होती है।
$3$. निषेचन और विकास: परागण द्वारा परागकण वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित होते हैं। नर युग्मक अंड कोशिका के साथ मिलकर एक द्विगुणित $(2n)$ युग्मनज (zygote) बनाते हैं। युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है,जो अंततः एक नए बीजाणुद्भिद पौधे के रूप में बढ़ता है,जिससे चक्र पूरा होता है।